Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad – Amazing 2020

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भारत के पूर्व राष्ट्रपति, मिसाइल मैन – अब्दुल कलाम जी की प्रेरणादाई जीवन गाथा;Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad

हमारे देश में एक ऐसी शख्सियत का जन्म हुआ था जिसने राजनीती और विज्ञानं के क्षेत्र में हमें बहुत कुछ दिया है  और उनके दिए गए अविष्कारों से आज भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व उन पर गर्व करता है।  उस शख्सियत का नाम है A.P.J. Abdul Kalam . विज्ञानं के क्षेत्र में हमें बहुत कुछ देने वाले इस शख्सियत का जन्म १५ अक्टूबर १९३१ को रामेश्वर तमिलनाडु में हुआ।  अब्दुल कलाम मुस्लिम धर्म से थे।  उनके पिता का नाम जैनुलआबिदिनी था जो नव चलते थे और इनकी माता का नाम आशिअम्मा था।
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Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad: बचपन और शिक्षा 

अब्दुल कलाम जी का बचपन बहुत ही संघर्षों में गुजरा।  क्योंकि वे गरीब परिवार से थे और वे बचपन काम किया करते थे।  अपनी गरीबी के कारन बचपनसेही उन्होंने अपने पढाई के साथ काम करना शुरू क्र दिया था।  वे लोगोंके घर घर जा कर अख़बार बांटने का काम करते थे।  बचपन की उम्र में ही माँ बाप को आर्थिक सहायता कर सके इस भाव से वो जो मिले वो काम करते थे। उन्होंने रामेश्वरम, रामनाथपुरम के श्वार्टज़ हायर सेकेंडरी स्कूल में अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की।

Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad :कॉलेज और करियर की दौर 

कॉलेज की पढाई सेन्ट जोसफ कॉलेज में पूरी की।  १९५४ में उन्होंने फिजिक्स से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। बचपन से कलाम जी कुछ नया सिखने की जिज्ञासा और दृढ़ इच्छा रखते थे।  वे पढाई भी करते तो पूरी लगन और जिज्ञासा से किया करते थे। उनकी रूचि विज्ञानं में थी। अपनी आगे की पढाई पूरी करने के लिए उन्होंने १९५५ में मद्रास जाना तय किया। वहा जाने के बाद उन्होंने अंतरिक्ष की शिक्षा ग्रहण की। उनकी शिक्षा का दौर १९५८ से १९६० तक चलता रहा।

Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad: करियर – वैज्ञानिक

अपनी शिक्षा को पूर्ण करने का बाद अब्दुल कलाम ने एक वैज्ञानिक के रूप में डी.र.डी.ओ. यानि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन में काम किया।अब्दुल कलाम जी का सपना था की वो भारतीय वायु सेना में एक पायलट बने और देश के लिए कुछ करे। इसके लिए वो काफी प्रयास करते रहे।  लेकिन वो इसमें नहीं जा पाए परन्तु उन्होंने अपने इसी सपने को सकारात्मक माध्यम से एक नई दिशा दी और उन्होंने शुरुआत में भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलीकाप्टर का मोडल तैयार किया।
D.R.D.O. में काम करने के बाद अब्दुल कलाम की करियर यात्रा ISRO की और बढ़ी। सन  १९६९ में उनका कदम ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन पर पड़ा।  जहा पर वो कई परियोजनाओं के निदेशक के रूप में काम करते रहे और गर्व की बात ये है की इसी दौरान १९८० में इन्होंने भारत के पहले उपग्रह “पृथ्वी” या SLV 3 को पृथ्वी के निकट सफलतापूर्वक स्थापित किया।  इन्होंने भारत के लिए ये काम इतना बड़ा कर दिया था की वो इनके इस काम की वजह से हमारा देश आंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बना।

Inspirational story of Missile Man Abdul Kalam Aajad: उपलब्धियां 

अब्दुल कलाम निरंतर विज्ञानं के लिए नया-नया काम करते रहे जिसमें उन्होंने भारत के पहले परमाणु परिक्षण को भी साकार करने में अपना सहयोग दिया।  इतना ही नहीं, इन्होंने नासा यानि नेशनल एरोनॉटिक्स एन्ड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन की यात्रा भी की।  अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की इतनी तरक्की दिलाने से भारत सर्कार द्वारा १९८१ में इन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया।
सं १९८२ में उन्होंने गाइडेड मिसाइल पर काम किया।  अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतनी लगन और निष्ठा को देखते हुए भारत सरकार ने १९९० में फिर इन्हें पद्म विभूषण से नवाजा जो की बहुत ही गर्व की बात है।
अब्दुल कलामजी को रक्षा मंत्री के विज्ञानं सलाहकार के रूप में भी चुना गया।  जिस पर वो १९९२ से १९९९ तक रहे। इतनी ही नहीं इस कार्यकाल के मध्य में यानि १९९७ में उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया।  इसी तरह योगदान देते हुए उन्होंने आगे भारत के दूसरे परमाणु परिक्षण को सफल बनाया।


सन २००२ तक भारत को अब्दुल कलम जी इस हद तक ले जा चुके थे जहा तक भारत को सोचना भी मुश्किल था। और इसी योगदान की सफलता का फल उन्हें भारत का राष्ट्रपति बनके मिला। सन २००२ में उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया और २००२ से २००७ तक उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभाला।  उनको उनकी काम की वजह से

“मिसाइल मन” जैसे कई नाम से जाना जाता है।
इसके बाद उन्होंने शिक्षा संस्थाओं के कई पद पर कार्य किया।  २७ जुलाई २०१५ को वो शिलोंग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में लेक्चर देने गए थे।  इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अब्दुल कलाम  आजाद जी को इस दुनिया से विदा होना पड़ा।
भले ही आज कलम साहब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उन्होंने हमारे भारत को इतना कुछ दिया है की वो हमारे लिए आज भी जिंदा है।
ऐसे महापुरुष को हम सभी भारतीयों का सलाम !
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